डीपफेक पर गंभीर का वार
भारतीय टीम के मुख्य कोच Gautam Gambhir ने AI डीपफेक और फर्जी कंटेंट के खिलाफ Delhi High Court में याचिका दायर की. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना अनुमति उनके चेहरे, आवाज और नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से छवि को नुकसान पहुंचा. गंभीर ने 2.5 करोड़ रुपये हर्जाना और ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने की मांग की.
दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने अपनी छवि और पहचान के कथित दुरुपयोग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट (HC) का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी अनुमति के बिना एआई तकनीक के जरिए उनकी पहचान का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है.
मामला क्या है?
गंभीर की ओर से 19 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट के कमर्शियल डिवीजन में एक सिविल याचिका दाखिल की गई. इस याचिका में कहा गया है कि बीते कुछ समय से उनके नाम, चेहरे और आवाज का उपयोग कर फर्जी कंटेंट तैयार किया जा रहा है, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है.
डीपफेक और एआई कंटेंट पर आपत्ति
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डीपफेक वीडियो, फेस-स्वैपिंग और वॉइस क्लोनिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर भ्रामक (Misleading) सामग्री बनाई जा रही है. इन फर्जी वीडियो के जरिए न केवल गलत जानकारी फैलाई जा रही है, बल्कि कुछ लोग इससे आर्थिक लाभ भी कमा रहे हैं.
कानूनी कार्रवाई और मांगें
गंभीर ने अदालत से अपनी पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है. साथ ही उन्होंने 2.5 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए ऐसे सभी आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटाने के निर्देश देने की गुहार लगाई है.
गंभीर का बयान
गंभीर का कहना है कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत छवि का मामला नहीं है, बल्कि यह कानून और सार्वजनिक व्यक्तित्व की गरिमा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है. उन्होंने यह भी कहा कि एआई के इस दौर में इस तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण जरूरी है, ताकि किसी की पहचान का दुरुपयोग न हो सके.
सोशल मीडिया पर बढ़ते मामले
उनकी कानूनी टीम के अनुसार, 2025 के अंत से इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे फर्जी कंटेंट की संख्या तेजी से बढ़ी है. कई वीडियो वायरल भी हुए, जिनमें से एक में उनके इस्तीफे का झूठा दावा किया गया, जबकि दूसरे में उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया.
बढ़ती चिंता
गंभीर पहले भी सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना कर चुके हैं, लेकिन अब एआई तकनीक के जरिए बनाए जा रहे नकली वीडियो ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है. यह मामला अब डिजिटल युग में पब्लिक फिगर्स की सुरक्षा को लेकर एक अहम बहस खड़ी कर रहा है.
