Pitch-Curator

दिल्ली: क्रिकेट के खेल में पिच (Pitch) सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. कोई भी अच्छी या ख़राब पिच मैच का परिणाम बदल सकती है. क्रिकेट में आमतौर पर 4 प्रकार की फ़्लैट, हार्ड, रैंक टर्नर और ग्रीन टॉप पिच होती हैं. फ़्लैट और हार्ड पिचें बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ों दोनों के लिए अच्छी मानी जाती हैं. रैंक टर्नर पिच पर स्पिन गेंदबाज़ अपनी स्पेशल कला का जादू बिखेरते हैं. वहीं, ग्रीन टॉप पिचें आमतौर पर तेज़ गेंदबाज़ों के लिए जन्नत साबित होती हैं. 22 यार्ड की इन सभी पिचों को बनाने की ज़िम्मेदारी पिच क्यूरेटर (Pitch Curator) की होती है.

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कैसे बनाई जाती है क्रिकेट पिच

क्रिकेट पिच बनाने के लिए आमतौर पर ज़मीन को 3 फ़ीट गहरा खोदा जाता है. इसके बाद उसमें पत्थर और कोयले भरे जाते हैं. फिर ऊपर से काली और लाल मिट्टी या मोरंग डाला जाता है. इसके बाद 90% रेत और 10% मिट्टी का मिश्रण मिलाकर इसे रोलर से समतल किया जाता है. फिर पिच पर घास लगाने की प्रक्रिया शुरू होती है. अंत में पिच का PH वैल्यू 630 से 730 के बीच रखा जाता है. यही एक आदर्श पिच मानी जाती है.

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हर देश में बनती है अलग पिच

अगर पिच क्यूरेटर चाहे तो वो किसी भी मैच को 1 घंटे में ख़त्म कर सकता है. लेकिन पिच बनाने के लिए क्यूरेटर को आईसीसी और संबंधित बोर्ड के नियम और क़ानून का पालन करना पड़ता है. पिच क्यूरेटर अक्सर अपने-अपने देशों के अनुसार इसमें बदलाव करते रहते हैं. इंग्लैंड, साउथ अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया की पिच हरी और उछाल भरी होती हैं, जबकि भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश पिच अधिक धीमे और ढलानदार होते हैं. दुनिया की कुछ बेहतरीन पिचें जैसे सिडनी क्रिकेट ग्राउंड, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड और ईडन गार्डन्स को पिच क्यूरेटर की वजह से दुनिया की सबसे बेहतरीन पिचों में से एक माना जाता है.

क्रिकेट की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पिच क्यूरेटर कौन हैं, पिच क्यूरेटर कैसे बनते हैं, पिच क्यूरेटर का क्या काम होता है और उसे 1 मैच के लिए कितनी फ़ीस मिलती है? चलिए इस आर्टिकल में सब कुछ जानते हैं-

भारत में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने दलजीत सिंह को देश भर की सभी क्रिकेट पिचों की देखभाल की ज़िम्मेदारी दी हुई है. दलजीत को BCCI द्वारा निर्धारित एक परीक्षा पास करने के बाद इस पद पर नियुक्त किया गया था. वो भारत में क्रिकेट पिचों के रखरखाव के लिए ज़िम्मेदार हैं. इसके अलावा वो पिचों को क्यूरेट करने के लिए वरिष्ठ क्यूरेटर के साथ भी काम करते हैं. क्रिकेट पिच क्यूरेटर बनना सिर्फ़ खेल के प्रति प्यार ही नहीं बल्कि इसके लिए एक खास किस्म की स्किल और ज्ञान की ज़रूरत भी होती है.

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पिच क्यूरेटर बनने के लिए आपको इन चीज़ों का नॉलेज होना बेहद ज़रूरी है-

1- मौसम और मिट्टी की विशेषज्ञता

पिच क्यूरेटर को मौसम की स्थितियों की गहन समझ होनी चाहिए. क्योंकि मौसम पिच के व्यवहार को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है. इसके अलावा मिट्टी की स्थिति का व्यापक ज्ञान भी आवश्यक है. पिच क्यूरेटर खिलाड़ियों को चुनौती देने और उन्हें आकर्षित करने वाली पिच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

2- रसायन विज्ञान की जानकारी

क्रिकेट के खेल में साइंस और मैथ्स का इस्तेमाल काफ़ी होता है. ऐसे में पिच क्यूरेटर बनने के लिए रसायन विज्ञान (Chemistry) की बुनियादी समझ होना बेहद ज़रूरी है. मिट्टी की पिच तैयार करने के लिए रसायन विज्ञान में अच्छी तरह से पारंगत होना आवश्यक है.

3- पिच मैनेजमेंट

पिच मैनेजमेंट क्यूरेटर की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है. पिच क्यूरेटर पूरे मैच के दौरान पिच की स्थिति पर नज़र बनाए रखता है. इसमें पिच की निगरानी करना, रोलिंग करना यदि आवश्यक है. इसके अलावा मैच को निष्पक्ष और रोमांचक बनाए रखने के लिए किसी भी मुद्दे को तुरंत संबोधित करना भी शामिल है.

4- पदार्थों और उनके प्रभाव की नॉलेज

किसी भी पिच क्यूरेटर को क्रिकेट पिच तैयार करने में उपयोग किए जाने वाले पदार्थों के बारे में गहरी जानकारी होनी आवश्यक है. ये जनना आवश्यक है कि कौन से पदार्थ पिच की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं और पिच को ख़राब होने से बचाने के लिए किन पदार्थों से बचना चाहिए.

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दुनिया के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट पिच क्यूरेटर

बेस्ट पिच क्यूरेटर वही होता है जिसे मिट्टी, मौसम, घास, नमी, रोलिंग, पिच कवरिंग आदि की बेहतरीन नॉलेज हो. भारत के सुनील चौहान (एचपीसीए स्टेडियम, धर्मशाला), साउथ अफ़्रीका के क्रिस स्कॉट (वांडरर्स स्टेडियम, जोहान्सबर्ग), इंग्लैंड के स्टीव बिर्क्स (ट्रेंट ब्रिज, नॉटिंघम), न्यूज़ीलैंड के ब्रेट सिपथोर्प (बेसिन रिजर्व, वेलिंगटन) और वेस्ट इंडीज़ के माइकल हाइल्टन (सबीना पार्क, जमैका) दुनिया के कुछ जाने-माने पिच क्यूरेटर हैं. ऑस्ट्रेलिया के लेस बर्डेट (Les Burdett) को दुनिया के सबसे बेहतरीन क्यूरेटर में से एक माना जाता था. उन्होंने 41 साल तक एडिलेड ओवल पिच की देखभाल की थी. ​​हालांकि, वो अब रिटायर हो चुके हैं. बर्डेट को दुनिया भर की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीमें और अधिकारी ‘पिच डॉक्टर’ या ‘पिच व्हिस्परर’ के नाम से जानते थे.

भारत के कुछ मशहूर पिच क्यूरेटर

भारत की बात करें तो प्रभीर मुखर्जी (ईडन गार्डन, कोलकाता), रसिक मकवाना (राजकोट, गुजरात), सीताराम (फ़िरोज़शाह कोटला, दिल्ली), अर्जुन (वानखेड़े, मुंबई) और रमेश महामुनकर (वानखेड़े और बांद्रा कुर्ला कॉम्लेक्स ग्राउंड) देश के सबसे मशहूर पिच क्यूरेटर माने जाते हैं. अगर वर्तमान दौर की बात करें तो जसिंथा कल्याण ( Jacintha Kalyan) भारत की पहली महिला पिच क्यूरेटर हैं.

भारत में क्रिकेट पिच क्यूरेटर का वेतन

भारत में क्रिकेट पिच क्यूरेटर का पारिश्रमिक उनके अनुभव और योग्यता पर निर्भर करता है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने पिच क्यूरेटर को 35,000 रुपये से लेकर 70,000 रुपये प्रति माह तक का वेतन देता है. लेकिन स्टेट क्रिकेट बोर्ड से जुड़े पिच क्यूरेटर्स को बेहद कम सैलरी मिलती है. ये 20,000 रुपये प्रति माह से 25,000 रुपये प्रति माह के बीच होती है. पिच क्यूरेटर्स को मासिक सैलरी के अलावा प्रति मैच बोनस और इंसेंटिव्स भी मिलते हैं. अगर कोई मैच हाई स्कोरिंग के बावजूद रोमांचक बने तो ऐसे में पिच क्यूरेटर्स को परफॉर्मेंस बोनस भी मिलता है.

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