भारतीय क्रिकेट टीम के इस तेज गेंदबाज ने खुलासा किया है कि उनके दिमाग में यह बात घर कर गई है कि वह बहुत अच्छे हैं.

दिल्ली : जसप्रीत बुमराह यकीनन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में से एक हैं. लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम के इस तेज गेंदबाज ने खुलासा किया है कि उनके दिमाग में यह बात घर कर गई है कि वह बहुत अच्छे हैं. हालांकि बुमराह ने लोगों और प्रशंसकों पर यह फैसला छोड़ दिया है कि दुनिया का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज कौन है. भारतीय तेज गेंदबाज ने दावा किया है कि उनका आत्मविश्वास बहुत अधिक है, और बचपन से ही उन्हें यह खेल बहुत पसंद है और वह अपनी टीम को जिताने के लिए कुछ भी करना चाहते हैं.

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इसके अलावा, जसप्रीत बुमराह ने कहा कि वह गेंदबाजों की वकालत करते हैं. क्योंकि इस खेल में जिसमें बल्लेबाजों का दबदबा होता है, वहां गेंदबाजी करना काफी मुश्किल होता है. बुमराह का मानना ​​है कि गेंदबाज ही खेल को आगे बढ़ाते हैं.

सर्वश्रेष्ट होने को लेकर क्या कहा?

जसप्रीत बुमराह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कुछ चीजे मैं नही तय करता वह बस मेरे दिमाग मे होती है, जब मैंने शुरुआत की थी, तब भी मैं हमेशा यही सोचता था कि मैं बहुत अच्छा हूं. अगर मुझे खुद पर विश्वास नहीं है, तो और कौन करेगा? कहानियां कभी-कभी बदल सकती हैं, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि मैं अच्छा हूं. बचपन में मुझे तेज गेंदबाजी करना पसंद था और मैं अपनी टीम को जीत दिलाना चाहता था.

क्रिकेट आक्रामकता का खेल है. हर खिलाड़ी का आक्रामकता दिखाने का अपना तरीका होता है. बुमराह का दावा है कि किसी और की आक्रामकता की नकल करना बेकार है. उनका दावा है कि आक्रामकता के मामले में हद से ज़्यादा आगे निकल जाना अच्छा नहीं है, क्योंकि इससे टीम को ज़्यादा नुकसान हो सकता है.

बुमराह ने कहा, आक्रामकता के कई मायने होते हैं. आप शांत भी हो सकते हैं और आक्रामक भी. आपको समझना होगा कि आप एक इंसान के तौर पर कौन हैं. आप किसी की नकल करने की कोशिश नहीं कर सकते. आपको यह पता लगाना होगा कि आपके लिए क्या कारगर है. आप आक्रामक होने का दिखावा नहीं कर सकते.


आगे बुमराह ने कहा “मैं एक तेज़ गेंदबाज़ हूँ, मुझे पसंद बाउंड्रीज पसंद नही है. जब मैं छोटा था, और मुझे कोई हिट मारता था तो मैं गुस्सा हो जाता था और फिर बहुत तेज़ गेंदबाज़ी करने की कोशिश करता था. यह मेरे लिए कभी कारगर नहीं रहा, क्योंकि मैं लाइन और लेंथ गवां बैठता था. और इससे टीम को कोई मदद नहीं मिलती थी. इसलिए, मुझे एहसास हुआ कि गुस्सा होना या हद से ज़्यादा आगे निकल जाना ज़रूरी नहीं है.