MCC ने बताया रन आउट क्यों सही था
ढाका में खेले गए पाकिस्तान और बांग्लादेश के दूसरे ODI में सलमान अली आगा का रन आउट बड़ा विवाद बन गया. गेंद रोकते समय मेहदी हसन मिराज और आगा की टक्कर हो गई थी. आगा क्रीज से बाहर थे और मिराज ने स्टंप्स गिरा दिए. तीसरे अंपायर ने उन्हें आउट दिया. MCC ने कहा कि उस समय गेंद खेल में थी और बल्लेबाज क्रीज से बाहर था. इसलिए नियमों के मुताबिक फैसला बिल्कुल सही था.
दिल्ली: ढाका में खेले गए पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच दूसरे वनडे मैच में सलमान अली आगा का रन आउट काफी चर्चा में रहा. इस घटना के बाद खेल भावना और नियमों को लेकर बहस छिड़ गई थी. अब क्रिकेट के नियमों की देखरेख करने वाली संस्था मेरिलिबॉन क्रिकेट क्लब (MCC) ने इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और अंपायर के फैसले को नियमों के अनुरूप सही बताया है.
घटना क्या थी
मैच के 39वें ओवर में पाकिस्तान के विकेटकीपर बल्लेबाजमोहम्मद रिजवान ने एक शॉट खेला. गेंद को रोकने के प्रयास में बांग्लादेश के गेंदबाज मेहदी हसन मिराज और नॉन-स्ट्राइकर एंड पर खड़े सलमान आगा आपस में टकरा गए. उस समय आगा अपनी क्रीज से बाहर थे. उन्हें लगा कि गेंद अब खेल से बाहर हो चुकी है, इसलिए वह उसे उठाने के लिए झुक गए. इसी दौरान मिराज ने तुरंत गेंद उठाई और स्टंप्स पर मार दी. मामला तीसरे अंपायर के पास गया, जहां रिप्ले देखने के बाद आगा को रन आउट करार दे दिया गया.
एमसीसी ने नियमों के आधार पर फैसला बताया सही
इस घटना के बाद कई लोगों ने अंपायर के फैसले पर सवाल उठाए थे. हालांकि एमसीसी ने साफ कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों में अंपायर के पास बल्लेबाज को नॉट आउट देने का कोई विकल्प नहीं था, जब बेल्स गिराई गईं, उस समय सलमान अली आगा क्रीज से बाहर थे और गेंद अभी भी खेल में थी. ऐसे में नियमों के मुताबिक, यह साफ तौर पर रन आउट बनता है.
गेंद को छूते तो और मुश्किल में पड़ सकते थे
एमसीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आगा गेंद को हाथ से छू लेते, तो स्थिति और जटिल हो सकती थी. उस हालत में उन्हें मैदान में बाधा डालने के नियम के तहत भी आउट दिया जा सकता था, इसलिए नियमों की दृष्टि से अंपायर का निर्णय पूरी तरह उचित था.
टक्कर होने से गेंद डेड नहीं मानी जाती
घटना के बाद कुछ प्रशंसकों का मानना था कि खिलाड़ियों की टक्कर के कारण गेंद को डेड घोषित कर देना चाहिए था. इस पर एमसीसी ने कहा कि मौजूदा नियमों में सिर्फ टकराव होने से गेंद अपने आप डेड नहीं मानी जाती. संस्था के मुताबिक, यदि ऐसा प्रावधान होता, तो खिलाड़ी इसका गलत फायदा उठाने के लिए जानबूझकर टकराने जैसी स्थिति भी बना सकते थे. साथ ही इस घटना में किसी खिलाड़ी को गंभीर चोट भी नहीं लगी थी, इसलिए खेल जारी रहना स्वाभाविक था.
नए नियम के बावजूद नतीजा वही रहता
एमसीसी ने यह भी बताया कि अक्टूबर से क्रिकेट में कुछ संशोधित नियम लागू किए जाने वाले हैं. इन नियमों के तहत अंपायर यह तय कर सकेंगे कि जमीन पर पड़ी गेंद पूरी तरह से रुक चुकी है या नहीं. हालांकि, संस्था का कहना है कि यदि यह नया नियम इस मैच के दौरान लागू भी होता, तब भी इस घटना में नतीजा रन आउट ही रहता. कारण यह है कि जब कोई फील्डर सक्रिय रूप से गेंद को पकड़कर बल्लेबाज को रन आउट करने की कोशिश कर रहा हो और बल्लेबाज क्रीज से बाहर हो, तब गेंद को पूरी तरह रुका हुआ मानना मुश्किल होता है.
खेल भावना पर भी उठे सवाल
इस रन आउट के बाद खेल भावना को लेकर भी चर्चा तेज हो गई थी. सलमान अली आगा ने भी कहा था कि यदि वह उस स्थिति में होते, तो संभवतः खेल भावना दिखाते. इस पर एमसीसी ने माना कि बांग्लादेश की टीम चाहती तो अपनी अपील वापस लेकर बल्लेबाज को वापस बुला सकती थी, क्योंकि कप्तान के पास ऐसा अधिकार होता है, लेकिन एक बार अपील हो जाने के बाद अंपायर को केवल नियमों के आधार पर ही फैसला देना पड़ता है.
