विश्व कप 10 टीमों का टूर्नामेंट है और ग्रुप राउंड के बाद सिर्फ 4 टीम सेमीफाइनल खेलेंगी यानि कि 6 को ग्रुप राउंड के बाद ही घर लौटना होगा – दक्षिण अफ्रीका के लिए निराशा की बात ये है कि वे इतना खराब खेले कि 7 मैच में ही तय हो गया कि उन्हें लौटना होगा। अब तक तो विश्व कप में हो ये रहा था कि अच्छा खेलते खेलते अचानक ही एक बड़ा मैच खराब खेलकर पिछली पूरी मेहनत बेकार कर देते थे। इस बार इसकी भी नौबत नहीं आई।
24 जून के मैच नंबर 31 तक दक्षिण अफ्रीका 3 अंक (7 मैच में 1 जीत और 1 मैच रद्द) तथा – 0.324 के नैट रन रेट के साथ नंबर 9 टीम था और ये रिकॉर्ड अपने आप बता देता है कि वे कहां हैं? उनसे नीचे सिर्फ अफगानिस्तान है। कई टीम ने अभी भी उनसे कम मैच खेले हैं पर रिकॉर्ड बेहतर। बल्लेबाजी और गेंदबाजी में साधारण प्रदर्शन के साथ साथ ग्राउंड से बाहर की टीम की खबरों ने टीम का भला नहीं किया।
प्रदर्शन देखिए:
– 7 मैच में दक्षिण अफ्रीका ने कुल 1403 रन बनाए – बांग्लादेश ने 1771, ऑस्ट्रेलिया ने 1835 और इंग्लैंड ने 1853 रन बनाए हालांकि 6-6 मैच ही खेले हैं।
– औसतन प्रति विकेट 31.18 रन बनाए – चार टीम पाकिस्तान (30.22), वेस्टइंडीज (30.00), श्रीलंका (20.92) और अफगानिस्तान (19.85) का ही रिकॉर्ड इससे खराब है पर टॉप टीम भारत (51.91) और दक्षिण अफ्रीका के बीच का फर्क तो देखिए।
– दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों ने 111 चौके लगाए – अफगानिस्तान (122), इंग्लैंड (148), बांग्लादेश (159) और ऑस्ट्रेलिया (165) के एकाउंट में इससे ज्यादा चौके हैं।
– सिर्फ 19 छक्के लगे उनके लिए – अफगानिस्तान (20), पाकिस्तान (24), ऑस्ट्रेलिया (35), वेस्टइंडीज (39) और इंग्लैंड (52) का एकाउंट इससे बेहतर है।
– सच तो ये है कि चौके-छक्के की बदौलत बनाए रन के प्रतिशत में दक्षिण अफ्रीका (39.77) से खराब रिकॉर्ड सिर्फ श्रीलंका (37.25) का है।
– 7 मैच में एक भी शतक नहीं।
– गेंदबाजों ने प्रति विकेट 37.78 रन बनने दिए – सिर्फ बांग्लादेश (41.00) और अफगानिस्तान (42.03) का रिकॉर्ड इससे खराब है।
प्रदर्शन का यह रिकॉर्ड साफ बता देता है कि दक्षिण अफ्रीका क्यों सबसे पहले बाहर होने वाली बड़ी टीम बना। दक्षिण अफ्रीका को अभी ग्रुप राउंड में दो मैच और खेलने हैं, जो सिर्फ रिकॉर्ड के लिए होंगे और टीम के प्रदर्शन का असली पोस्ट मार्टम तो उन दो मैच के बाद होगा पर फाफ डु प्लेसिस ने कहा – ‘इन दो मैच में अब हम बिना किसी डर खेलेंगे क्योंकि खोने के लिए कुछ नहीं बचा।’ इसी से यह भी पता लग जाता है कि जैसे जैसे टीम के न जीत पाने का सिलसिला आगे बढ़ा टीम दबाव में आती गई और खेल और खराब होता गया।
जब दक्षिण अफ्रीका की टीम विश्व कप में आई थी तो आईसीसी वन डे इंटरनेशनल रेंकिंग में नंबर 3 थी – वन डे की 5 सीरीज जीतने की बदौलत। वास्तव में लगभग एक साल पहले की श्रीलंका में जीत ही उनमें से किसी खास चर्चा के योग्य थी अन्यथा तो जिंबाब्वे, खुद मुश्किल में जूझ रही पाकिस्तान और फिर से श्रीलंका को हराना बहुत बड़ी कामयाबी नहीं थी। ऑस्ट्रेलिया को तब ऑस्ट्रेलिया में 2-1 से हराया, जब वे बॉल टेंपरिंग के किस्से से संभल ही नहीं पाए थे।
बाद में डी विलियर्स के विश्व कप में खेलने की चाह की खबर ने टीम को तोड़ दिया। दो खास क्रिकेटरों की खराब फॉर्म ने मुश्किल और बढ़ा दी – हाशिम अमला का रन का और रबाडा का विकेट का सूखा टीम के लिए खेल की लय बिगाड़ने वाला साबित हुआ। उस पर टूर्नामेंट शुरू होते ही डेल स्टेन को चोट लग गई। इस खबर के लीक होने से भी कोई भला नहीं हुआ कि टीम मैनेजमेंट चाहती थी कि आईपीएल के बीच से उन सभी खिलाड़ियों को वापस बुला लें, जिन्हें विश्व कप के लिए जाना है पर भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सामने उनके बोर्ड की एक न चली।
2015 विश्व कप से पहले बोर्ड ने खिलाड़ियों को स्विट्जरलैंड में एल्पस की खूबसूरत वादियों में भेजा था ताजी हवा लेने, दिमाग तरो ताजा करने तथा विश्व कप के लिए अच्छी तरह तैयार होने के लिए। इस बार केप टाउन स्टेडियम से नजर आने वाले टेबल माउंटेन पर चढ़ा दिया खर्चा बचाने के लिए। दक्षिण अफ्रीका में मीडिया का कहना है बोर्ड ने खर्चा कम किया तो क्रिकेटरों ने रन और विकेट में कंजूसी कर दी।
