दक्षिण अफ्रीका इस विश्व कप से ग्रुप राउंड के दौरान बाहर होने वाली पहली बड़ी टीम बनी। पहले 7 मैच से ही उनका नोक आउट में न खेलना तय हो गया था। इस नामकायाबी की वजह की, जब लिस्ट बनाई तो ज्यादातर विशेषज्ञों ने टॉप पर विश्व कप शुरू होने के समय दक्षिण अफ्रीका के स्टार गेंदबाज, कगिसो रबाडा की नाकामयाबी को लिखा, जिस तरह भारत ने जसप्रीत बुमराह, इंग्लैंड ने जोफ्रा आर्चर, ऑस्ट्रेलिया ने मिचेल स्टार्क, श्रीलंका ने लसिथ मलिंगा और पाकिस्तान ने मोहम्मद आमिर को अपना स्टार गेंदबाज गिना, वैसा ही दक्षिण अफ्रीका ने किया था और वे गलत कहां थे?

दक्षिण अफ्रीका के पहले सातों मैच (24 जून 2019 तक) में वे खेले – टीम ने यही उम्मीद लगाई कि वे फॉर्म में आएंगे पर कोई फायदा नहीं हुआ। टीम के अन्य सभी गेंदबाजों से ज्यादा 58 ओवर डाले (उसके बाद: इमरान ताहिर 57), सबसे ज्यादा 305 रन दिए (उसके बाद इमरान ताहिर 279), नियमित गेंदबाजों में 50.83 औसत के हिसाब से सबसे महंगे थे (उनके बाद: फेहलुकायो 34.50), स्ट्राइक रेट 58.0 में भी सबसे बेकार (उनके बाद: फेहलुकायो 38.2) और विकेट सिर्फ 6 लिए – नियमित गेंदबाजों में से चार ने उनसे ज्यादा विकेट लिए। अगर स्टार गेंदबाज का रिकॉर्ड ऐसा होगा तो टीम कहां से बचेगी?

अगर रबाडा के 6 विकेट को ही योग्यता स्तर मान लें तो रबाडा ने विश्व कप में सबसे घटिया औसत दर्ज की (उनके बाद: इंग्लैंड के आदिल रशीद 6 मैच में 7 विकेट के लिए 44.86), सबसे घटिया स्ट्राइक रेट (उनके बाद आदिल रशीद 45.43), तब भी सबसे ज्यादा 348 गेंद फेंकी (उनके बाद: इमरान ताहिर 342), 10 वाइड फेंकी (वहाब रियाज के बराबर और 7 गेंदबाज ने इससे ज्यादा गेंद फेंकी) पर तारीफ ये कि नो बाल में कोई रन नहीं दिया।

रबाडा के इस मामूली दर्जे के प्रदर्शन को इस विश्व कप में नाकामयाबी की अकेली मिसाल नहीं गिना जाएगा पर रबाडा की नाकामयाबी ने दक्षिण अफ्रीका की विश्व कप की कोशिश को तो पटरी से उतार दिया। वजह? पूरा दोष आईपीएल में रबाडा के थकने को दिया जा रहा है। इस सीजन में वे दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेले और टीम के इस सीजन के बेहतर रिकॉर्ड की सबसे बड़ी वजह में से वे एक थे, जब सीजन के बीच में ही पीठ में तकलीफ की वजह से लौटे तब तक 12 मैच में 14.72 औसत से 25 विकेट ले चुके थे। आईपीएल में आखिरी मैच 28 अप्रैल तक खेला और अंतर्राष्ट्रीय एक्शन में आए 24 मई को कार्डिफ में श्रीलंका के विरूद्ध वार्म अप मैच में। इसलिए यह नहीं कहेंगे कि रबाडा को फिट होने के लिए दिन नहीं मिले। तब भी उनकी विश्व कप में खराब फार्म को सीधे आईपीएल में खेलने से जोड़ा जा रहा है।

रबाडा ने कहा – ‘प्लान यही था कि आईपीएल से जल्दी लौट आऊंगा पर ऐसा हुआ नहीं। वजह मुझसे मत पूछिए। लौटकर दिन फिट होने में निकल गए।’ कप्तान फाफ डु प्लेसिस तो और साफ साफ बोल रहे हैं – ‘कोशिश तो ये थी रबाडा आईपीएल खेलने ही न जाएं। उसके बाद कोशिश की कि जब आईपीएल में आधे मैच हुए थे तो वे वापस आ जाएं। उनका जल्दी लौटना सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि टीम के लिए भी जरूरी था। वही हुआ कि विश्व कप में खराब शुरूआत से रबाडा की गेंदबाजी की लय ऐसी बिगड़ी कि वे संभल ही नहीं पाए।’ रबाडा नहीं मानते कि वे आईपीएल की वजह से थके हुए थे पर उनकी बात मानने वाले बहुत कम है।

खब्बू बल्लेबाज और दांए हाथ के तेज गेंदबाज रबाडा ने 2015 विश्व कप के बाद शुरू हुए अंतर्राष्ट्रीय करियर में बहुत जल्दी जिम्मेदारी संभाल ली – 37 टेस्ट में 21.77 औसत से 176 विकेट और विश्व कप के ख़राब रिकॉर्ड के बावजूद वन डे इंटरनेशनल करियर में 73 मैच में 112 विकेट। विश्व कप शुरू होने पर रबाडा का रिकॉर्ड 66 मैच में 106 विकेट था और तब तक कम से कम 106 विकेट लेने वलो 135 गेंदबाजों में वे औसत के अनुसार नंबर 35 थे और 31.83 के स्ट्राइक रेट के हिसाब से नंबर 17 थे। अब ये पायदान भी ख़राब हो गई।

टीम के बचे दो मैच में उन्हें कितना मौका मिलता है या वे क्या करते हैं – इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जब टीम को जरूरत थी तो रबाडा ने विकेट नहीं लिए।

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