सोचो तो ज़रा, मैच चल रहा है वो भी रणजी ट्रॉफी का पहला मैच, और बीच मैदान में कौन आ जाते हैं? नाग देवता। अब समझ आया कि क्रिकेट इस देश में कैसे इतना फल-फूल रहा है। इसके पीछे तो कई देवीय शक्तियां काम कर रही हैं। सोमवार को विजयवाड़ा में रणजी ट्रॉफी के पहले मैच का आगाज़ हुआ। आंध्र प्रदेश और विदर्भ के बीच के इस मुकाबले में दोनों टीमों को स्वयं आशिर्वाद देने नाग देवता आए।

बीच मैदान में टेढ़े-मेढ़े रेंग रहे थे। वो तो गली में खड़े एक खिलाड़ी ने देखा और नाग देवता को प्रणाम किया, लेकिन नाग देवता उस समय बहुत क्रोधित हुए। उनका कहना था कि मेरे आशिर्वाद के बिना मैच कैसे शुरु हो गया। अब मैं अंपायर को काटूंगा। न अंपायर रहेगा और न ही मैच होगा।

बस इतना कहना था कि दोनों अंपायर मैदान छोड़कर भाग गए और कल से घर नहीं लौटे हैं। बोले तो अंडरग्राउंड हो गए हैं। नाग देवता का गुस्सा देखकर मैदान में भगदड़ सी मच गई। ये सब देखते हुए खुद बीसीसीआई के कुछ बड़े लोग मैदान में आए और उन्होंने नाग देवता को दुध देकर शांत किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद बीसीसीआई, मैदान में मौजूद खिलाड़ी और दर्शकों ने सर झुकाकर माफी मांगी, तब कहीं जाकर नाग देवता शांत हुए। इसके बाद दोनों टीमों के सभी खिलाड़ियों ने एक-एक करके नाग देवता से विजय श्री का आशिर्वाद लिया। तब कहीं जाकर बात ठंडी हुई। पहले वाले अंपायरों का तो फोन भी स्विच ऑफ आ रहा था, तो फिर बीसीसीआई ने जुगाड़ करके पार्ट टाइम अंपायरों का इंतज़ाम किया।

मैदान के स्टॉफ ने पूरे सम्मान से नाग देवता को ले जाने का बंदोबस्त किया, लेकिन नाग देवता ने कह दिया, “ज्यादा नौटंकी करने की ज़रुरत नहीं है, मैनें बोल दिया न कि किसी को नहीं काटूंगा। मेरे लिए इंतजाम करने की कोई ज़रुरत नहीं है, मैं खुद ही चला जाऊंगा।” नाग देवता धीरे-धीरे रेंगते हुए मैदान से बाहर चले गए और आगे जाकर गायब हो गए। कुछ आधे-एक घंटे चली इस नौटंकी का वीडियो बीसीसीआई ने शेयर किया है।

कमाल है कभी मैच बारिश की वजह से रुकता है सुना है, कभी लाइट की वजह से होता है सुना है, यहां तक कि मधुमक्खियों की वजह से भी मैच रुका है, ये भी सुना है। इन्हीं किस्सों में एक किस्सा ये भी जुड़ गया। नाग देवता या आस्था होना अलग बात है, लेकिन ये हो क्या रहा है। सिक्योरिटी क्या कर रही है, मैनेजमेंट क्या कर रहा है?

कोई भी मैच के बीच में घुस रहा है। अब कल को कुत्ता-बिल्ली, सुअर भी मैदान में दिखेंगे। क्रिकेट इस देश में खेल से बढ़कर है, क्योंकि वो लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है और लोगों की आस्था नाग देवता से। विदर्भ और आंध्र के बीच मैच चाहे जैसा भी हुआ हो, लेकिन सेंटर ऑफ अटरैक्शन नाग देवता ही रहे। कल मैन ऑफ द मैच के असली हकदार नाग देवता ही थे। बीसीसीआई कितना भी अमीर हो, लेकिन कल की हरकत ने ये प्रूफ कर दिया कि क्रिकेट में अंधविश्वास कितना कूट-कूट के भरा हुआ है।

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